नेशन स्टोरी ब्लॉग: जेट- दुर्भाग्यजनक विफलता

नेशन स्टोरी ब्लॉग: जेट- दुर्भाग्यजनक विफलता

नए ब्रांड आते हैं और पुराने जाते हैं। खासकर विमानन कंपनियों के बारे में यह बात बारंबार सही साबित होती रही है। लेकिन जेट एयरवेज का जाना वास्तव में बहुत बड़ी क्षति है। केवल विमानन क्षेत्र ही नहीं बल्कि देश की छवि को भी जेट ने बदला था। उसने यात्रियों को आरामदेह यात्र उपलब्ध कराई। उसकी सेवाओं पर आंख मूंदकर विश्वास किया जा सकता था। आखिरी कुछ वर्ष जेट एयरवेज के लिए काफी चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन उसने यात्रियों की सेवा में कमी नहीं आने दी। 

भारत की विमानन सेवा निजी क्षेत्र के आगमन के पहले बहुत सुखद नहीं थी। विमानों द्वारा समय सारिणी का पालन नहीं किया जाता था, उड़ान में कितनी देरी होगी, इसकी पहले से जानकारी नहीं दी जाती थी। हवाई अड्डों पर बहुत साफ-सफाई दिखाई नहीं देती थी, विमानन कंपनियों के कर्मचारियों का व्यवहार यात्रियों के प्रति उपेक्षापूर्ण होता था, खाद्य पदार्थ गुणवत्तापूर्ण नहीं होते थे। इस तरह की ढेरों दिक्कतें थीं। निजी विमानन कंपनियों ने इस नजारे को बदला और यात्रियों को बेहतर   सुविधा देने की प्रतिस्पर्धा शुरू की। पहले सिर्फ वीआईपी को ही उत्तम सेवा प्रदान की जाती थी। निजी कंपनियों ने इस र्ढे को बदला। 

देश में उदारीकरण के बारे में लोगों की राय भले ही अलग-अलग हो, लेकिन इसमें दो मत नहीं कि  उदारीकरण की वजह से ही देश में लोगों को विकल्प उपलब्ध हुए। इसका सर्वाधिक असर सेवा क्षेत्र में दिखा। भारतवासियों के खुद पर विश्वास को दृढ़ करने का काम जेट जैसे ब्रांडों ने किया। प्रतिस्पर्धा भरे युग में वैश्विक स्तर की सेवा प्रदान करना एक चुनौती ही है। जेट ने इस चुनौती का सफलता के साथ सामना किया। आज जहां तक घरेलू हवाई यात्र की गुणवत्ता का सवाल है, भारत उन्नत देशों के समकक्ष है। लेकिन भारत में विमान सेवा को गुणवत्ता के इस स्तर पर पहुंचाने वाली कंपनी का आज यह हाल होना दुखद है। इस विफलता के लिए एयरलाइंस और उसका प्रबंधन दोषी हो सकते हैं, लेकिन यात्रियों को उत्तम सेवा देने वाले कर्मचारियों के रूप में ब्रांड की छवि धूमिल नहीं हुई है और किसी न किसी रूप में वह ब्रांड पुनर्जीवित होगा, ऐसी उम्मीद उसके शुभचिंतकों को है।