क्रिकेट विश्व कप का इतिहास: क्या कप्तान से नाखुश होकर गावस्कर ने खेली थी वनडे इतिहास की सबसे धीमी पारी?

क्रिकेट विश्व कप का इतिहास: क्या कप्तान से नाखुश होकर गावस्कर ने खेली थी वनडे इतिहास की सबसे धीमी पारी?

क्रिकेट इतिहास का पहला वर्ल्ड कप साल 1975 में इंग्लैंड में 14 फरवरी से 29 मार्च के बीच खेला गया। इसमें भारत ने अपना पहला मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेला। टीम इंडिया को इस मुकाबले में करारी शिकस्त मिली। ऐसी हार, जिसे शायद ही कोई भूल सके, खासकर सुनील गावस्कर... 

गावस्कर ने इस मैच में 174 गेंदों में महज 36 रन बनाए, जो वनडे क्रिकेट की सबसे धीमी पारी मानी जाती है। गावस्कर ने इस दौरान 1 ही चौका लगाया और उनका स्ट्राइक रेट रहा 20.69 का।

इंग्लैंड ने बनाए 334, भारत 202 रन से हारा:

लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान में खेले गए क्रिकेट वर्ल्ड कप इतिहास के इस सबसे पहले मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर बैटिंग करते हुए 60 ओवर में 4 विकेट पर 334 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इंग्लैंड के लिए डेनिस ऐमिस ने 137, कीथ फ्लेचर ने 68 और क्रिस ओल्ड ने 50 रन की शानदार पारी खेली। भारत की तरफ से आबिद अली ने 12 ओवर में 58 रन देकर 2 विकेट झटके। 

इसके जवाब में भारतीय टीम 60 ओवर में 3 विकेट पर 132 रन ही बना सकी और मैच 202 रन के बड़े अंतर से गंवा बैठी। सुनील गावस्कर ने 174 गेंदों में 36 नाबाद रन की बेहद धीमी पारी खेली। इसके अलावा गुंडप्पा विश्वनाथ ने 59 गेंदों में 5 चौकों की मदद से 37 रन बनाए।

जिस मैच में गावस्कर ने महज 20.68 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए, उसी मैच में इंग्लैंड के लिए डेनिस ऐमिस ने 93.19 के स्ट्राइक रेट से 147 गेंदों में 137 रन की जोरदार पारी खेली थी। यही नहीं क्रिस ओल्ड ने तो महज 30 गेंदों में 170 के स्ट्राइक रेट से 51 रन ठोक दिए थे।

भारत उस वर्ल्ड कप में सिर्फ एक मैच, ईस्ट अफ्रीका के खिलाफ ही जीत सका और पांचवें स्थान पर रहा। रोचक बात ये है कि जिस दिन गावस्कर ने अपनी धीमी बैटिंग से रिकॉर्ड बनाया उसी दिन ईस्ट अफ्रीका के खिलाफ न्यूजीलैंड के ग्लन टर्नर ने 201 गेंदों पर 171 रन की तूफानी खेली थी।

गावस्कर पर लगे गंभीर आरोप:

टीम मैनेजर जीएस रामचंद्र ने गावस्कर की धीमी बल्लेबाजी को लेकर बीसीसीआई से शिकायत की। उन्होंने कहा कि गावस्कर ने ऐसी इनिंग खेल टीम का मनोबल गिराया है, जिससे युवा खिलाड़ियों के मनोदशा पर भी प्रभाव पड़ेगा। गावस्कर पर ये तक आरोप लगे कि वह टीम की कप्तानी वेंकटराघन को सौंपे जाने से काफी खफा थे, जिसके चलते उन्होंने इतनी धीमी पारी खेली। 

हालांकि गावस्कर ने कई साल बाद खुद ये बात कबूली कि उस दौरान वह आउट ऑफ फॉर्म थे। गावस्कर ने कहा कि उन्होंने कई बार स्टंप छोड़ कर खेला, ताकि बोल्ड हो जाएं। यही एक तरीका था, जिससे वह उस वक्त मानसिक पीड़ा से बच सकते थे, क्योंकि वह रन नहीं ले पा रहे थे। उनकी स्थिति एक मशीन जैसी थी, जो सिर्फ चल रही थी। आत्मकथा 'सनी डेज' में उन्होंने इसे क्रिकेट करियर की सबसे घटिया पारी बताई।

इस मुकाबले में अंशुमन गायकवाड़ भी खेल रहे थे। उन्होंने इसका जिक्र करते हुए कहा था, "पूरी टीम के खिलाड़ियों को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। सभी हैरानी में थे कि गावस्कर जैसा दिग्गज बल्लेबाज ऐसी बल्लेबाजी कैसे कर सकता है?"