कांग्रेस का बड़ा चुनावी वायदा, इन देशों में भी लागू है न्यूनतम आय गारंटी योजना

कांग्रेस का बड़ा चुनावी वायदा, इन देशों में भी लागू है न्यूनतम आय गारंटी योजना

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को वादा किया है कि अगर लोकसभा चुनाव 2019 के बाद उनकी सरकार बनती है तो वह सभी ग़रीबों के लिए एक न्यूनतम आय देने के लिए यूनीवर्सल बेसिक इनकम (UBI) योजना को लागू करेंगे। इससे पहले आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में केंद सरकार ने पहली बार यूबीआई का जिक्र किया था। राहुल गांधी ने कहा 'यह योजना ऐतिहासिक है और दुनिया में ऐसी स्कीम अब तक नहीं है।'

हालांकि उनका यह दावा कि ये योजना अब तक दुनिया में लागू नहीं हुई है यह पूरी तरह से गलत है।अगर यह योजना भारत में लागू हुई तो यह अकेला देश नहीं होगा।

इसके अलावा भी यह योजना 58 देश अलग-अलग नाम से लागू है।

यह योजना सउदी अरब, अंडोरा, लिथुआनिया, कतर, स्लोवाकिया, ब्रुनेई, यूनाईटेड अरब अमीरात, लातविया, पुर्तगाल, बहरीन, चिली, हंगरी, क्रोएशिया, अर्जेंटिना, ओमान, रूस, मोंटेरो, बुल्गारिया, रोमानिया, बेलारुस, बहमास, उरुग्वे, कुवैत, बेलारुस,  मलेशिया, कजाकिस्तान, बारबाडोस, नार्वे, स्विटजरलैंड, आस्ट्रेलिया, आयरलैंड, जर्मनी, आइसलैंड, हांगकांग, स्वीडन, सिंगापुर, नीदरलेंड, डेनमार्क, कनाडा, अमरीका, फिनलैंड, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, लिंचेस्टीन, जापान, आस्ट्रिया, लक्जमबर्ग, इजरायल, दक्षिणी कोरिया, फ्रांस, स्लोवेनिया, स्पैन, चैक गणराज्य, इटली, माल्टा, एस्टोनिया, ग्रीस, साइप्रस, पोलैंड, में अलग-अलग नाम से जानी जाती है।

जानें क्या है यूनीवर्सल बेसिक इनकम (UBI) योजना?
यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूआईबी) एक फिक्स अमाउंट है जो देश के सभी के सभी गरीब परिवार को सरकार से मिलती है। हालांकि अभी तक हर नागरिक को न्यूनतम आय सरकार द्वारा सुनिश्चित करना है। 

राहुल गांधी के वादे के अनुसार अगर यह योजना लागू होती है तो देश के 20 फीसदी सबसे गरीब परिवारों को सालाना 72 हजार रुपये दिये जाएंगे। इसके साथ ही गरीब परिवारों के लिए हर महीने 12,000 रुपये आय जरूरी होगा। अगर कोई भी परिवार इससे कम कमाता है तो सरकार इसे सुनिश्चित करेगी।' इस योजना से देश के 5 करोड़ परिवारों और कम से कम 25 करोड़ लोगों को सीधे तौर पर फायदा पहुंचेगा। 

जनवरी 2017 में फ़िनलैंड ने यूनीवर्सल बेसिक इनकम योजना का एक ट्रायल किया था, जिसे आगे चलकर साल 2019 में बंद कर दिया गया। उधर, ईरान भी सरकार ने अपने नागरिकों को एक फिक्स अमाउंट देता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की योजना पर दिनों-दिन बढ़ती महंगाई से इसका मूल्य कर दिया है इसके बाद यह योजना वहां के ज्यादातर लोगों के लिए बेकार साबित हुई।