राफेल विवादः 12 साल पहले शुरू हुई थी राफेल की कहानी, जानें इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ

राफेल विवादः 12 साल पहले शुरू हुई थी राफेल की कहानी, जानें इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ

राफेल विवाद पर मुसीबतों से उबर रही मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने राफेल सौदे से संबंधित कुछ नए दस्तावेजों को आधार बनाये जाने पर केंद्र की आपत्ति ठुकरा दी है। इन दस्तावेजों पर केंद्र सरकार ने विशेषाधिकार का दावा किया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह राफेल पर पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई के लिए तारीख तय करेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से चुनावी मौसम में राफेल विवाद की गर्माहट बढ़ने की आशंका है। ऐसे में जानिए कब शुरू हुई थी राफेल की कहानी और कैसे साल दर साल बदलते रहे राजनीतिक पेंच...

- साल 2007 में वायुसेना की ओर से मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया। इसके बाद भारत सरकार ने 126 लड़ाकू विमानों को खरीदने का टेंडर जारी किया

-  साल 2012 में यूपीए की सरकार थी। भारतीय वायुसेना गुणवत्तापरक लड़ाकू विमानों की मांग लंबे समय से कर रही थी। लड़ाकू विमानों की रेस में अमेरिका के बोइंग एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉरनेट, फ्रांस का डसॉल्‍ट राफेल, ब्रिटेन का यूरोफाइटर, अमेरिका का लॉकहीड मार्टिन एफ-16 फाल्‍कन, रूस का मिखोयान मिग-35 और स्वीडन के साब जैसे 39 ग्रिपेन जैसे एयरक्राफ्ट शामिल थे, लेकिन राफेल ने बाजी मारी। 

- भारत ने फ्रांस से 126 राफेल विमान खरीदने का फैसला किया था। उस वक्त योजना थी कि फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन से भारत 18 रेडी टू फ्लाई राफेल विमान खरीदेगा और बाकि 108 विमान बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में असेंबल किए जाएंगे। कीमतों को लेकर बात अटकी हुई थी और इस बीच भारत में चुनाव हुए। 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार बन गई।

- अप्रैल 2015 की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि भारत सरकार फ्रांस में बनाए गए 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद करेगी जिन्हें फ्रांस की हथियार निर्माण कंपनी डसॉल्ट एविएशन बना रही है।

- मोदी सरकार ने यूपीए की 126 राफेल विमान खरीदने की योजना में थोड़ा परिवर्तन किया। सरकार ने कहा कि दो इंजन वाले राफेल विमान काफी महंगे हैं। पीएम मोदी के दखल के बाद 126 की बजाए सिर्फ 36 'रेडी टू फ्लाई' विमानों को खरीदने का फैसला किया गया बजाए इसके कि डसॉल्ट से टेक्नोलॉजी लेकर भारत में बनाया जाए। 

- जनवरी 2016 में भारत ने फ्रांस की डेसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल जेट का ऑर्डर दिया। साथ ही यह भी करार किया गया कि वो अपनी टेक्नोलॉजी डीआरडीओ, एचएएल और कुछ प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों से भी साझा करेगी। सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच एक एग्रीमेंट हुआ जिसे राफेल सौदा कहते हैं। 

- नवंबर 2016 में इस राफेल सौदे पर राजनीतिक घमासान शुरू हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 58,000 करोड़ रुपये का सौदा करके देश के करदाताओं के पैसे की बर्बादी की जा रही है। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को गलत तरीके से फ्रांस की फर्म का इंडियन पार्टनर बनाया गया। कांग्रेस सरकार ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने जितने में यह सौदा 2012 में तय किया था उससे तीन गुना ज्यादा कीमत में मोदी सरकार ने सौदा किया।

- रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि पिछली यूपीए सरकार ने 10 सालों से विमानों की खरीद लटका रखी थी, यह जानते हुए भी कि भारतीय वायुसेना को इसकी सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने यूपीए के मुताबले सस्ते में यह सौदा किया है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वो बिना तथ्यों को जाने ही शोर मचा रहे हैं।

- 20 जुलाई 2018 को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के फ्रांस दौरे पर ऐसा क्या जादू चला कि अचानक राफेल विमान की कीमत तीन गुना बढ़ गई। उन्होंने कहा कि मुझसे फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा कोई समझौता नहीं है जिससे विमान की कीमतों का खुलासा ना किया जा सके।

- सितंबर 2018 को राफेल डील पर मचे घमासान के बीच अब फ्रांस्वा ओलांद ने नया खुलासा किया है। फ़्रेंच अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस का नाम खुद भारत सरकार ने सुझाया था।

- 15 दिसंबर 2018 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपनी सीमाओं का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा कोई सुबूत नहीं मिला, जिससे  प्रक्रिया पर संदेह की जाए। अदालत ने कहा कि हम इस बात से संतुष्ट हैं कि प्रक्रिया को लेकर संदेह करने का कोई मौका नहीं मिला। अगर कोई मामूली विचलन भी हुआ होगा, तो अदालत की समीक्षा की ज़रूरत नहीं है।

- 10 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदे से संबंधित कुछ नए दस्तावेजों को आधार बनाये जाने पर केंद्र की आपत्ति ठुकरा दी है। इन दस्तावेजों पर केंद्र सरकार ने विशेषाधिकार का दावा किया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह राफेल पर पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई के लिए तारीख तय करेगा।