पर्यटन स्थल का दर्जा हासिल करने की बाट जोह रहा है विद्यापति धाम

पर्यटन स्थल का दर्जा हासिल करने की बाट जोह रहा है विद्यापति धाम

उजियारपुर में चुनाव की गहमागहमी के बीच गोस्वामी समुदाय सहित क्षेत्र के लोग मिथिला लोककंठ के नायक कवि कोकिल विद्यापति की समाधि भूमि विद्यापति धाम को राष्ट्रीय क्षितिज पर पहुंचाने के लिए पर्यटन स्थल का दर्जा देने और पिछले डेढ़ दशक पहले बंद हुए पर्यटन केंद्र को फिर से खोलने की बाट जोह रहे हैं । कवि परंपरा को जीवित रखने वाले गणेश गिरि कहते हैं कि मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति ने कार्तिक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को इसी पावन भूमि में महानिर्वाण प्राप्त किया था। यहां पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं ।

पहले यहां एक पर्यटन केंद्र हुआ करता था, लेकिन 15 वर्ष पहले उसे बंद कर दिया गया । यहां पर्यटन केंद्र खोलने से रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे, साथ ही राष्ट्रीय क्षितिज पर महाकवि विद्यापति की विरासत को सहेजने में मदद मिलेगी । उन्होंने कहा कि पूरे विद्यापति प्रखंड में एकमात्र ‘विद्यापति इंटर कालेज’ की मान्यता पिछले वर्ष समाप्त हो गई। इससे करीब 1800 छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है ।

वर्तमान सांसद ने इसके लिये प्रयास किया लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है । गौरतलब है कि विद्यापति प्रखंड की करीब एक दर्जन पंचायत में 1.25 लाख मतदाता हैं । विद्यापतिधाम में पूजा- अर्चना कराने वाले जगबंधु गिरि ने कहा कि यह क्षेत्र ज्ञान की भूमि रही है जहां वेद, संस्कृत भी पल्लवित होती रही हैं । बीते वर्षों में क्षेत्र का विकास भी हुआ है लेकिन ज्ञान परंपरा से जुड़े संस्कृत एवं वेद पाठशालाएं यहां नहीं हैं ।

संस्कृत एवं वेद शिक्षा के लिये बच्चों को वाराणसी एवं अन्य स्थानों पर भेजना पड़ता है । उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि वाराणसी का प्रतिनिधित्व करने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां संस्कृत एवं वैदिक शिक्षा के लिये संस्थान स्थापित करेंगे । क्षेत्र के लोग लम्बे समय से विद्यापति नगर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं । राम प्रकाश गिरि का कहना है कि विद्यापति नगर रेलवे स्टेशन का विकास एवं विस्तार हुआ है एवं अन्य विकास कार्य भी हो रहे हैं । लेकिन इसे पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बाद इलाके में विकास और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा एवं पलायन रूकेगा ।

इस क्षेत्र में रोजगार के अन्य साधन नहीं हैं । वर्तमान में यह बालेश्वर स्थान विद्यापतिधाम के नाम से प्रसिद्ध है। इस स्थान पर मैथिली, संस्कृत, बंगला, अवधी और अवहट्ट भाषा के विद्वान कवि कोकिल विद्यापति ने समाधि ली थी। ऐसी किंवदंति है कि विद्यापति जी के आह्वान पर माता गंगा स्वयं इस स्थान पर पहुंचीं तथा उन्हें कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी को अपने अंक में समेटते हुए लौट गयी थीं। किंवदंतियों के मुताबिक यहां स्वयं भगवान शिव कवि कोकिल की भक्ति भावना से प्रसन्न होकर विराजमान हुए थे।

समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय से आठ किलोमीटर दक्षिण तथा बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड से आठ किलोमीटर पश्चिम में स्थित यह तीर्थ स्थल पक्की सड़कों और रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है। यहां दर्शनीय स्थल एवं पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं । यहां से मात्र चार किलोमीटर दक्षिणवर्ती इलाके में गंगा नदी है, जहां चौमथ (चमथा) घाट पर राजा जनक के स्नान करने आने का उल्लेख भी ग्रंथों में मिलता है। किवदंतियों से जुड़े ब्रजमारा गाछी (जहां दस्युओं पर ब्रजपात हुआ था) की रक्त युक्त मिट्टी आज भी विद्यमान है।