आखिर क्यों ढह रहे हैं मुंबई के सेतु?

आखिर क्यों ढह रहे हैं मुंबई के सेतु?

साल 2017 में एलफिंस्टन ब्रिज गिरा, साल 2018 में सुबह-सुबह अंधेरी पुल हादसा हुआ और अब 2019 में, जबकि अभी बरसात भी नहीं आई है, यह सीएसटी पुल ढह गया। लगता है मुंबई के लिए जैसे हादसे अब आम बात ही नहीं रहे बल्कि रूटीन लाइफ का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन पहले गिरने-ढहने के ये तमाम हादसे आमतौर पर बारिश के दिनों में ही होते थे, जिसकी वजह भी सबको मालूम है। जी हां! मुंबई में 19000 से ज्यादा ऐसी जर्जर इमारतें हैं, जिनकी उम्र डेढ़ से दो सदी की हो चुकी है। हर बार चुनावों में और चुनावों के इतर भी होने वाली किसी भी तरह की राजनीतिक रैलियों में दक्षिण मुंबई की इन जर्जर इमारतों से मुंबई को छुटकारा दिलाने की बातें तो खूब की जाती हैं, लेकिन होता कहीं कुछ भी नहीं है।  

लेकिन लगता है अब इन इमारतों के साथ शहर के तमाम फुटओवर ब्रिजों ने भी कदम मिला लिया है। तभी तो महज 25 महीने के भीतर यह तीसरा पुल ढहा है। पुलों के ढहने का यह सिलसिला इसलिए इमारतों से भी ज्यादा खौफनाक है,  क्योंकि मुंबई में 1000 से ज्यादा पुल हैं। एक तरह से यह पूरा शहर ही पुलों को जोड़कर बना है। अगर पुलों के ढहने का सिलसिला इतना ही आम हो जाएगा तो पता नहीं मुंबई का क्या होगा? कल पुल का गिरना तो इसलिए भी आश्चर्यजनक है क्योंकि इसे तो अभी कुछ ही महीने पहले विशेषज्ञों से मजबूत होने का प्रमाण पत्र मिला था। 

दरअसल पिछले एलफिंस्टन पुल हादसे के बाद मुंबई हाईकोर्ट के निर्देश पर शहर के तमाम पुलों की सेफ्टी की जांच की गई थी। सेफ्टी ऑडिट ब्यूरो द्वारा कराई गई जांच में यह पुल पूरी तरह से दुरुस्त पाया गया था, क्योंकि बीएमसी ने हाईकोर्ट के आदेश पर शहर के जिन खतरनाक 445 पुलों की जांच की थी, उनमें यह पुल शामिल नहीं था। इसलिए इसके गिरने से सब हैरान हैं। सिर्फ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ ही नहीं बल्कि बीएमसी के जिम्मेदार कार्पोरेटरों से भी इस पर विस्तृत पूछताछ होनी चाहिए कि क्यों न उन्हें भी इस हादसे का दोषी माना जाए?